Sunday, April 6, 2014

एसएससी ने संयुक्त स्नातक स्तर परीक्षा स्थगित की


नई दिल्ली।
कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) ने लोकसभा चुनावों का हवाला देते हुए इस साल की संयुक्त स्नातक स्तर परीक्षा 2014 स्थगित कर दी है। यह परीक्षा 27 अप्रैल और 4 मई को होनी थी। एसएससी ने कहा कि परीक्षा की नई तारीख के बारे में बाद में सूचना दी जाएगी।
इसने एक नोटिस में कहा कि अप्रैल और मई 2014 में सरकार द्वारा घोषित आम चुनावों के मद्देनजर सभी आवदेकों को एतद द्वारा सूचित किया जाता है कि संयुक्त स्नातक स्तर परीक्षा 2014 को स्थगित रखा जाता है। सोमवार से शुरू हो रहे लोकसभा चुनाव की मतगणना 16 मई को होगी।आयोग चुनावों के बाद संयुक्त स्नातक स्तर परीक्षा 2013 को 7 केंद्रों- लखनऊ, पटना, इलाहाबाद, दिल्ली, जयपुर, शिमला और देहरादून में दोबारा आयोजित करेगा। ऐसी खबरें थीं कि इन केंद्रों पर अभ्यर्थियों ने कदाचार किया था।एसएससी ने संयुक्त स्नातक स्तर परीक्षा 2013 को 2 चरणों 21 अप्रैल और 19 मई 2013 को टियर-1 तथा 29 सितंबर 2013 को टियर-2 में आयोजित किया था।आयोग ने कहा कि इन 7 केंद्रों को छोड़कर अन्य केंद्रों पर परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा नहीं देनी होगी। (भाषा)

विधायकों का राजनीतिक भविष्य तय करेगा हिसार लोकसभा चुनाव



Sunday, June 23, 2013

खराब मौसम के बाद फिर शुरू हुए बचाव कार्य

उत्तराखंडः खराब मौसम के बाद फिर शुरू हुए बचाव कार्य 
देहरादून, एजेंसी

बारिश से प्रभावित उत्तराखंड में रविवार को सुबह खराब मौसम के चलते राहत और बचाव अभियान कुछ समय तक स्थगित रहने के बाद फिर से युद्धस्तर स्तर पर शुरू हो गया है और ऊंचाइयों पर अभी भी फंसे 22 हजार तीर्थयात्रियों को निकालने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।मौसम विभाग ने पूर्वानुमान व्यक्त किया है कि कल से क्षेत्र में हल्की बारिश शुरू हो सकती है। बारिश से सर्वाधिक प्रभावित रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिलों से अब तक करीब 70 हजार तीर्थयात्रियों को निकाला जा चुका है जहां हिमालय क्षेत्र के पवित्र तीर्थस्थ्सल केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री स्थित हैं।
राहत कार्यों में 40 से ज्यादा हेलीकॉप्टर, सेना और अर्धसैनिक बलों के 10 हजार कर्मी जुटे हुए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि देहरादून और जोशीमठ में हल्की बारिश की वजह से आज सुबह राहत कार्यों में विलम्ब हुआ, लेकिन करीब एक घंटे बाद जैसे ही मौसम खुला, राहत और बचावकर्मी फिर से अपने काम में जुट गए।
उन्होंने कहा कि हल्की से मध्यम बारिश होने के मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मद्देनजर राहत प्रयास तेज कर दिए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि कई टूटी सड़कों की मरम्मत कर दिए जाने से लोगों को निकालने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। फंसे हुए बहुत से लोगों को अब सड़क मार्गों के जरिए भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के उप महानिरीक्षक अमित प्रसाद ने बताया कि फंसे तीर्थयात्रियों को निकालने के लिए बद्रीनाथ के नजदीक करीब 50 किलोमीटर के क्षेत्र में पगडंडी बनाई जा रही है।
प्रसाद ने कहा कि यह मौसम पर निर्भरता कम करने के लिए है, जो हवाई राहत अभियान को प्रभावित कर सकता है। ये सड़कें तीर्थस्थल के नजदीक माना क्षेत्र में बनाई जा रही हैं। आईटीबीपी के लगभग 200 जवान इस काम में लगे हैं। उन्होंने कहा कि रुद्रप्रयाग के जंगलचट्टी इलाके में करीब 500 तीर्थयात्री फंसे हो सकते हैं और उन्हें वहां से जल्द से जल्द निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
केदारनाथ के नजदीक गौरी गांव और रामबड़ा में दो हेलीपैड बनाए गए हैं। आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने यहां कहा कि केदारनाथ घाटी से सभी फंसे हुए तीर्थयात्रियों को निकाल दिया गया है, अब पूरा ध्यान बद्रीनाथ की तरफ केंद्रित हो गया है जहां करीब सात-आठ हजार तीर्थयात्री फंसे हैं। अधिकारियों ने कहा कि उन्हें पर्याप्त खाद्य सामग्री और दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
इस अभूतपूर्व आपदा में मरने वालों की संख्या कल उस समय 673 हो गई, जब केदरानाथ क्षेत्र से 123 शव मिले। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का कहना है कि मरने वालों की संख्या एक हजार तक हो सकती है। बहुगुणा ने यह भी कहा कि केदारनाथ मंदिर को फिर से पहले जैसा स्वरूप देना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है और यह काम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के परामर्श से किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि विभिन्न स्थानों से मिले शवों का परंपरागत रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया जाएगा और मृतकों की आत्मा की शांति के लिए आपदा के 13वें दिन हरिद्वार में महायज्ञ किया जाएगा। यह सलाह संत समाज ने उस समय दी जब बहुगुणा और केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिन्दे कल हरिद्वार में उनसे मिले।
कल प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद बहुगुणा से मिले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कर इसे देश के अत्याधुनिक मंदिरों में से एक बनाने में राज्य सरकार को हरसंभव मदद देने की पेशकश की।

डेरा सच्चा सौदा ने उतराखंड में भेजी राहत सामग्री

डेरा सच्चा सौदा ने उतराखंड में भेजी राहत सामग्री 

उतराखंड में राहत कार्यों के लिए पहुंचे डेरा अनुयायी

उतराखंड में राहत कार्यों के लिए पहुंचे डेरा अनुयायी 

250 रुपए में मिल रहा एक परांठा , चिप्स का पैकेट 100 रुपए का

फंसे पर्यटक अनुचित दामों पर भोजन खरीदने को विवश
250 रुपए में मिल रहा एक परांठा , चिप्स का पैकेट 100 रुपए का 
देहरादून, एजेंसी

उत्तराखंड में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए जहां कुछ लोग पूरी कोशिश कर रहे हैं और उनकी रक्षा के लिए दुआएं की जा रही हैं, ऐसे में प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे लोगों के प्रति मानव उदासीनता की शर्मनाक खबरें भी सामने आ रही हैं।बाढ़ के कारण यहां फंसे लोगों को एक परांठे के लिए 250 रुपए और चिप्स के एक छोटे से पैकेट के लिए 100 रुपए देने पड़ रहे हैं। बाढ़ पीड़ित 56 वर्षीय देहरादून निवासी मनोहर लाल मौर्य ने कहा कि मुझे एक छोटी कटोरी चावल के लिए 40 रुपए देने पड़े। यहां कहीं भी भोजन उपलब्ध नहीं है।
उत्तर प्रदेश के अमित गुप्ता के संबंधी गौमुख में फंसे हुए हैं। अमित ने अपने संबंधियों से बात करने के बाद बताया कि उनके संबंधियों को चिप्स के दो छोटे पैकेट और पानी की दो बोतलों के लिए 400 रुपए देने पड़े।बाढ़ में फंसे अधिकतर लोगों के पास अधिक धन और सामान नहीं है और उनके लिए भोजन और पानी खरीदना बहुत मुश्किल हो गया है। बाढ़ में फंसे एक सिख पर्यटक ने कहा कि कुछ स्थानीय लोग उनकी बेबसी का फायदा उठा रहे हैं।
पर्यटक ने कहा कि टैक्सी चालक पहले जहां जाने के लिए 1000 रुपए लेते थे, अब वहां जाने के लिए 3000 से 4000 रुपए देने पड़ रहे हैं। हमारा पूरा धन खर्च हो गया है। हम असहाय हैं। रेलवे स्टेशन पर इंतजार कर रहे एक अन्य पर्यटक ने कहा कि दुकानदार 250 रुपए में एक परांठा और 200 रुपए में पानी की बोतल बेच रहे हैं। यह बहुत शर्मनाक बात है। सैकड़ों लोगों को कई दिनों से खाने के लिए कुछ नहीं मिल पाने की खबरों के बीच अधिकारी प्रभावित इलाकों में खाद्य सामग्री भेजने के प्रयास कर रहे हैं।

उत्तराखण्ड आपदा: सेना ने 18 हजार लोगों को बचाया

उत्तराखण्ड आपदा: सेना ने 18 हजार लोगों को बचाया
लखनऊ, एजेंसी

उत्तराखण्ड में कुदरत के कहर की विभीषिका झेल रहे जहां-तहां फंसे लोगों की जीने की आस पूरी रखने के लिये सेना जुटी है और अब तक दुर्गम तथा जंगलों से ढके—छुपे इलाकों में कई दिनों से भूख—प्यास से तड़प रहे करीब 18 हजार लोगों को बाहर निकाला गया है।उत्तराखण्ड में प्रलयंकारी आपदा के बाद राहत कार्य में जुटी सेना की मध्य कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चैत ने शनिवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि बेहद दुर्गम और खतरनाक इलाकों में सेना के जवान फंसे लोगों को ढूंढ रहे हैं और अब तक गंगोत्री, जोशीमठ, बद्रीनाथ, केदारनाथ, पिण्डारी ग्लेशियर समेत विभिन्न इलाकों से करीब 18 हजार लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
उन्होंने बताया कि कई दिनों से भूख—प्यास से बेहाल लोगों को चिकित्सा सुविधा के लिये 19 मेडिकल केन्द्रों तथा आरामगृहों की व्यवस्था की गयी है।चैत ने बताया कि बादल फटने के कारण नदियों में उफान से मची तबाही से उत्तराखण्ड का करीब चालीस हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र प्रभावित है। चारों धामों को देखे तो करीब 400 किमी सड़क पर असर पड़ा है। इस चुनौतीपूर्ण आपदा से निपटने के लिये सेना के साढ़े आठ हजार जवान हर जगह मुस्तैदी से तैनात हैं।
उन्होंने बताया कि सेना के पास पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं और वह तमाम भौगोलिक दिक्कतों के बीच कहीं पर छोटे—छोटे पुल बनाकर तो कहीं दूसरे जरियों से लोगों को बाहर निकाल रही है। गंगोत्री क्षेत्र में कल तक 500 लोगों को निकाला गया।
चैत ने बताया कि कल उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से आपदा राहत सम्बन्धी प्रयासों के सिलसिले में बात की थी।मध्य कमान के प्रमुख अनिल चैत ने बताया कि गंगोत्री में एक नया हेलीपैड स्थापित कर लिया है। गंगोत्री में कल तक करीब 500 लोग फंसे थे। उस जगह पर रास्ते बनाए जा रहे हैं और उम्मीद है कि गंगोत्री में फंसे लोगों को कल तक बाहर निकाल लिया जाएगा।चैत ने बताया कि सेना के जवानों ने कल से आज तक विभिन्न इलाकों में फंसे 728 लोगों की उनके परिजन से बात करायी है। जवानों ने मंगल चटटी के दुर्गम स्थानों पर पहुंचकर वहां फंसे करीब एक हजार लोगों को राहत मुहैया करायी गयी। वहां से लोगों को निकालकर गौरीकुंड लाना शुरू कर दिया गया है। इसी के साथ तलाश और पहुंच कार्य तेजी से किया जा रहा है।
उन्होंने कहा मैं भरोसा दिलाता हूं कि हम आपको निराश नहीं करेंगे। हम अपनी आंखों के सामने पड़ने वाले हर इंसान को बचाएंगे। चैत ने बताया कि बद्रीनाथ से होते हुए जोशीमठ और फिर एद्रप्रयाग की तरफ जाने वाले रास्ते पर अलकनंदा नदी पर बने पुल से कुछ लोग निकाले गये लेकिन वे पुल पानी के तेज बहाव में बह गये। आज फिर पुल बनाए गये है। आज रात तक गड़रिया और गोविंदधाम में फंसे लोगों को निकाल लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पिण्डारी ग्लेशियर के पास 45 बच्चों का एक समूह फंसा था। सेना के जवानों ने उनसे सम्पर्क करके उन्हें सुरक्षित बचा लिया है। एक अन्य ग्रुप को तलाशा जा रहा है। चैत ने कहा कि उत्तराखण्ड में आये सैलाब का असर उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी जिलों में बहने वाली नदियों पर पड़ रहा है सेना ने पीलीभीत जिले में बाढ़ से प्रभावित सबसे ज्यादा दो हजार 400 लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

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